भाबा वैली (Pin Bhaba Trek) : दिल को छू जाने वाला एक साहसी सफर
नमस्कार साथियों,
आज मैं Blog लिखने की नई शुरुआत कर रहा हूँ वैसे तो कहते सुना है की अपने भावों को शब्दों में व्यान करना एक कला है परंतु मैं कोई कलाकार नहीं, फिर भी एक छोटी सी शुरुआत करने जा रहा हूँ उम्मीद करता हूँ आप इसे दिलचस्पी से पड़ेंगे । वैसे तो आजकल के समय में “Travel Vlog Videography” का दौर है हर कोई अपनी जीवन के हसीन पलों को कैमरा में क़ैद करके सोशल मीडिया में साँझा करता है । मेरा यूँ Blog लिखना कहीं ना कहीं मुझे भी अटपटा सा लग रहा है पर फिर भी शायद मुझे उम्मीद है । मैं आपको अपनी लेखनी से कभी न कभी प्रकृति को निकट से देखने के लिए प्रेरित कर सकूँगा ।
image May 2025
दिनांक 17/05/2025 की ही बात है, जब मैं और मेरी पत्नी ने भावा वैली के ट्रैक को जाने का मन बनाया जिसे हम शायद जिंदगी भर याद रखेंगे — हमारा ट्रैक टू भाबा वैली। हिमाचल प्रदेश के किन्नौर ज़िले में, बसी यह घाटी, जितनी खूबसूरत है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी। मैंने साल 2023 में अपने साथियों के साथ इस ट्रैक को पहले भी किया था। तब सब कुछ सुगम और व्यवस्थित था — मौसम साथ था, रास्ते खुले थे और हौसला जबान। लेकिन इस बार, कहानी कुछ अलग थी।
image June 2023
इस बार हमारी यात्रा की शुरुआत हुई काफ़नू गांव से क्योकिं ग्लेशियर आने से रास्ता शुरुआती चरण पर ही खस्ता हो चुका था । काफनू एक छोटा सा गांव हैं जो इस ट्रैक का प्रवेश द्वार माना जाता है। जैसे-जैसे हम जंगल के भीतर बढ़ते गए, प्रकृति की जटिलताएं और सुंदरता दोनों हमारे सामने खुलने लगीं। कुछ ही दूरी पर हमें ग्लेशियर का सामना करना पड़ा क्योकिं यह ग्लेशियर रास्ते के बीचों बीच आया हुआ था और इसके एक तरफ सतलुज नदी का जानलेवा बहाव, मानों जरा सा पैर फिसला तो फिसलते हुए नदी में जानलेवा डुबकी एक पल के लिए तो ऐसा लगा कि इस बार रहने देते हैं परन्तु मन नहीं माना और हमने ग्लेशियर को पार करने का निर्णय लिया ।
ग्लेशियरः -
ग्लेशियर लगभग 500 मीटर का था और ग्लेशियर के अंदर सतलूज नदी का बहाव ये जितना रोमांचित लग रहा है यह उतना ही भयानक भी था । परन्तु इस ग्लेशियर पर स्थाई लोगों का आना जाना लगा रहता है जिनको देखकर हमें भी ग्लेशियर में चलने का साहस आया । ग्लोशियर को पार करके हम एक घने जंगल के बीच पहुँचे वहाँ पर हमने एक जगह चुनी, अपना पहला कैंप लगाने के लिए। उस कैम्प साइट की लोकेशन ऐसी थी जैसे किसी फिल्म के सीन की शूटिंग हो — चारों ओर ऊँचे-ऊँचे पेड़, नीचे बहती हुई नदी, और ऊपर तारे टिमटिमाते हुए।
रात का अंधेरा हो चुका था हमने जल्दी से टैंट लगाया लकड़ियां इक्ट्ठी करके आग जलाई क्योकिं वहां ठण्ड़ सिकुड़ देने वाली थी । रात के खाने के लिए हम ग्रेवी घर से बनाकर लेकर आए थे । वहां पर हमने टमाटर-मटर की ग्रेवी को गर्म करके पनीर के साथ मिक्स किया और एक छोटे कुक्कर में चावल बनाए वो भी पूरी तरह पहाड़ी अंदाज़ में। आग की धीमी लपटों में जब मटर पनीर की खुशबू फैलने लगी, तो भूख भी चरम पर पहुँच गई। शायद वो खाना किसी होटल में बना होता तो उतना स्वाद नहीं लगता, जितना उस जंगल में आग की रोशनी में बना वह सादा भोजन लग रहा था। वह एक सच में एक अलग अनुभव था । पूरी रात हमने टेंट में बिताई। ठण्ड़ बढती जा रही थी और पानी के बहाव की आवाज़ें रह-रह कर डरा रही थीं, लेकिन उस डर में भी एक रोमांच छिपा था।
सुबह होते ही, हमने अपने अगले सफर की ओर कदम बढ़ाए। टैंट और अन्य भारी सामान को हम वहीं पर जहां हमने रात गुजारी थी । वहीं पर छोड़ दिया और कुछ खाने की चीजों को अपने साथ लेकर आगे के सफर के लिए चल पड़े ।
तूफ़ान की वजह से रास्ते में कई पेड़ गिरे हुए थे, जिससे एक बार तो हम रास्ता भी भूल गए जिस कारण हमारा सफर थोड़ा और बढ गया तथा कठिन हो गया परन्तु हमने गूगल मैप को ऑफलाइन डाउनलोड़ किया हुआ था जिससे हमें थोड़ी सहायता मिली और वैसे भी जब मंज़िल का नाम भाबा वैली हो, तो हिम्मत हारना सवाल ही नहीं उठता। आखिरकार, कुछ घंटों की चुनौतीपूर्ण चढ़ाई के बाद, हम उस मुकाम पर पहुँच ही गए जहां हमें पहुँचना था ।
मुलिंग कंड़ाः -
भाबा वैली, जो समुद्र तल से 2200 मीटर से लेकर लगभग 6000 मीटर की ऊँचाई तक फैली हुई है, केवल एक ट्रैकिंग डेस्टिनेशन नहीं है — यह एक एहसास है। यहाँ की हवाएं, यहाँ के जंगल, पहाड़, और यहाँ के लोग — सब कुछ मिलकर एक ऐसी याद बन जाते हैं जो जीवन भर के लिए साथ रह जाती है। यहां पहुँचकर हमने चाय और ग्रिल सैंड़विच बनाए और इन वादियों में अपनी जिदगीं का बहमुल्य समय व्यतीत किया ।
अगर आप भी भाबा वैली जाना चाहते हैं, तो कुछ बातें याद रखें:
- यह ट्रैक अब पहले जितना आसान नहीं रहा — तूफ़ानों ने रास्तों को और भी चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
- एक अच्छा गाइड, फर्स्ट एड किट, और जरूरी ट्रैकिंग गियर साथ रखना बेहद ज़रूरी है।
- मौसम की जानकारी ले कर चलें और आपातकालीन योजना भी बनाएं।
- लेकिन सबसे अहम बात — दिल में अगर जज़्बा हो, तो कोई भी ट्रैक मुश्किल नहीं होता।
- रास्ते में पीने के पानी की कोई कमी नहीं होगी ।
भाबा वैली ने हमें न केवल एक रोमांचक अनुभव दिया, बल्कि एक-दूसरे के और करीब आने का मौका भी। इस यात्रा ने हमें सिखाया कि कठिनाइयों में भी सौंदर्य छिपा होता है, बस नज़रें और नीयत साफ होनी चाहिए।
क्या आपने भी कभी ऐसा कोई ट्रैक किया है जो आपकी आत्मा को छू गया हो? अगर नहीं, तो भाबा वैली आपका इंतज़ार कर रही है।
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